डॉ.
अंबेडकर मेमोरियल वेलफेयर सोसायटी में श्रद्धांजलि सभा एवं व्याख्यान कार्यक्रम आयोजित, बहुजन आंदोलन के संघर्ष और
सामाजिक परिवर्तन पर हुआ मंथन
दिल्ली, समाजहित एक्सप्रेस (रघुबीर
सिंह गाड़ेगांवलिया) । जयपुर। बहुजन
नायक मान्यवर कांशीराम साहेब के 20वें परिनिर्वाण दिवस पर शनिवार को
डॉ. अंबेडकर मेमोरियल वेलफेयर सोसायटी राजस्थान, जयपुर के झालाना डूंगरी
स्थित भवन में श्रद्धांजलि सभा एवं व्याख्यान कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में प्रदेशभर से आए सोसायटी
के पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं और बहुजन आंदोलन
से जुड़े प्रबुद्धजनों ने भाग लिया।
उपस्थित जनों ने कांशीराम साहेब
के चित्र पर माल्यार्पण एवं
पुष्पांजलि अर्पित कर उनके संघर्षपूर्ण
जीवन, विचारों और बहुजन समाज
की सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक मुक्ति के लिए किए
गए ऐतिहासिक योगदान का स्मरण किया।
कार्यक्रम
को संबोधित करते हुए सोसायटी के अध्यक्ष एवं
पूर्व आईपीएस अधिकारी सत्यवीर सिंह ने कहा कि
मान्यवर कांशीराम साहेब के विचारों और
उनके संघर्ष के रास्ते पर
चलकर ही बहुजन समाज
सत्ता में अपनी निर्णायक भागीदारी हासिल कर सकता है।
कांशीराम साहेब ने बहुजन समाज
को अपनी सामूहिक शक्ति पहचानने और लोकतांत्रिक व्यवस्था
में सत्ता का भागीदार बनने
का रास्ता दिखाया। उन्होंने समाज को यह समझाया
कि संख्या बल तभी वास्तविक
शक्ति बनता है, जब वह वैचारिक
स्पष्टता, संगठन और राजनीतिक चेतना
से जुड़ता है।
सोसायटी
के उपाध्यक्ष रामेश्वर प्रसाद बैरवा ने कहा कि
कांशीराम साहेब का संपूर्ण जीवन
सामाजिक परिवर्तन के मिशन को
समर्पित था। उन्होंने बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के विचारों को
व्यापक जनसमुदाय तक पहुंचाने और
वंचित समाज को संगठित राजनीतिक
शक्ति में बदलने के लिए ऐतिहासिक
संघर्ष किया। उनका उद्देश्य केवल सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि ऐसी सामाजिक व्यवस्था का निर्माण करना
था, जिसमें बहुजन समाज को सम्मान, समान
अवसर और निर्णय लेने
की प्रक्रिया में उचित भागीदारी मिले।
सोसायटी
के संगठन महासचिव एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी जय नारायण शेर
ने कहा कि कांशीराम साहेब
को सच्ची श्रद्धांजलि उनके चित्र पर पुष्प अर्पित
करने मात्र से नहीं, बल्कि
उनके अधूरे मिशन को आगे बढ़ाने
से दी जा सकती
है। आज आवश्यकता है
कि बहुजन समाज शिक्षा को अपनी प्राथमिकता
बनाए, सामाजिक एकता मजबूत करे, संवैधानिक अधिकारों के प्रति जागरूक
हो और राजनीतिक भागीदारी
के महत्व को समझे। समाज
की वास्तविक प्रगति तभी संभव है, जब वह अपनी
समस्याओं के समाधान के
लिए स्वयं संगठित होकर नेतृत्व की भूमिका निभाए।
सोसायटी
के वरिष्ठ पदाधिकारी नरेंद्र अवस्थी ने अपने विचार
व्यक्त करते हुए कहा कि बहुजन समाज
को आपसी मतभेदों से ऊपर उठकर
व्यापक सामाजिक हितों के लिए एकजुट
होना होगा। समाज जब अपनी सामूहिक
शक्ति को पहचानकर संगठित
प्रयास करेगा, तभी सत्ता और संसाधनों में
उसकी प्रभावी भागीदारी का लक्ष्य हासिल
किया जा सकेगा। उन्होंने
युवाओं से शिक्षा, संगठन,
वैचारिक जागरूकता और सामाजिक नेतृत्व
के क्षेत्र में आगे आने का आह्वान किया।
सोसायटी
के पदाधिकारी रामनिवास दहिया ने बहुजन आंदोलन
में कांशीराम साहेब के योगदान को
रेखांकित करते हुए कहा कि उन्होंने वंचित
वर्गों में आत्मसम्मान और राजनीतिक चेतना
जगाने का ऐतिहासिक कार्य
किया। उनका संघर्ष इस बात का
प्रमाण है कि संगठित
सामाजिक शक्ति लोकतांत्रिक व्यवस्था में व्यापक परिवर्तन का आधार बन
सकती है।
सोसायटी
के पदाधिकारी रामनिवास राघव ने सामाजिक न्याय
और बहुजन राजनीतिक चेतना के महत्व पर
प्रकाश डालते हुए कहा कि कांशीराम साहेब
के विचार आज भी प्रासंगिक
हैं। उनके विचारों को जन-जन
तक पहुंचाने और समाज में
समानता, अधिकारों तथा राजनीतिक भागीदारी के प्रति जागरूकता
बढ़ाने के लिए निरंतर
प्रयास किए जाने चाहिए।
डॉ.
तरुण बांकोलिया ने शिक्षा को
बहुजन समाज के सशक्तीकरण का
महत्वपूर्ण माध्यम बताते हुए कहा कि शिक्षा के
विस्तार के साथ समाज
में वैचारिक जागरूकता और नेतृत्व क्षमता
का विकास आवश्यक है। युवाओं को कांशीराम साहेब
के संघर्ष से प्रेरणा लेकर
सामाजिक परिवर्तन के मिशन में
सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।
सोसायटी
के पदाधिकारी मोहनलाल बैरवा ने कहा कि
कांशीराम साहेब का जीवन संगठन
की शक्ति और सामूहिक संघर्ष
का प्रेरक उदाहरण है। उनके विचारों को आत्मसात करते
हुए बहुजन समाज को सामाजिक समानता,
संवैधानिक अधिकारों और न्यायपूर्ण व्यवस्था
के लिए संगठित प्रयास जारी रखने चाहिए।
कार्यक्रम
में अन्य वक्ताओं ने भी बहुजन
आंदोलन के संघर्ष, सामाजिक
एवं आर्थिक मुक्ति, राजनीतिक चेतना के निर्माण और
सत्ता में भागीदारी के लिए कांशीराम
साहेब द्वारा किए गए प्रयासों पर
विचार व्यक्त किए। वक्ताओं ने कहा कि
कांशीराम साहेब ने उन वर्गों
में आत्मसम्मान और राजनीतिक चेतना
जगाई, जिन्हें लंबे समय तक सत्ता एवं
निर्णय-निर्माण की प्रक्रिया से
दूर रखा गया था।
कार्यक्रम
में सोसायटी के अध्यक्ष सत्यवीर
सिंह (पूर्व आईपीएस), उपाध्यक्ष रामेश्वर प्रसाद बैरवा, संगठन महासचिव जय नारायण शेर
(पूर्व आईपीएस), नरेंद्र अवस्थी, रामनिवास दहिया, रामनिवास राघव, डॉ. तरुण बांकोलिया, मोहनलाल बैरवा, प्रो. बुगालिया सहित संस्था की केंद्रीय कार्यसमिति
के सदस्य, प्रदेशभर से आए पदाधिकारी,
कार्यकर्ता एवं बहुजन आंदोलन से जुड़े प्रबुद्धजन
उपस्थित रहे। प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों
से आए पदाधिकारियों एवं
कार्यकर्ताओं ने अतिथियों का
भीम दुपट्टा पहनाकर स्वागत किया।
कार्यक्रम
के समापन पर मान्यवर कांशीराम
साहेब के विचारों को
आत्मसात करने, बहुजन समाज में शिक्षा एवं राजनीतिक चेतना का विस्तार करने
और सामाजिक समानता, संवैधानिक मूल्यों तथा न्यायपूर्ण समाज की स्थापना के
लिए संगठित होकर कार्य करने का संकल्प व्यक्त
किया गया।


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